जीवन मूल्य भी देते है पिता
- पिता जीवन ही नहीं देते, जीवन मूल्य भी देते हैं। इस दुर्लभ संसार में लाने वाले पिता देवताओं, ऋषियों और देवतीर्र्थो से भी अधिक पूजनीय और वंदनीय हैं। आज जो भी वैभव, यश, मान और प्रतिष्ठ आपके पास है, उसमें पूज्य पिता की साधना, यश, तप और शुभकामनाओं की ही खुशबू यत्र-तत्र-सर्वत्र समाई है। उन्होंने तिल-तिल जलकर अपना सारा जीवन व शक्ति आपके व्यक्तित्व के निर्माण में लगा दिया।

- पिता का साया बरगद की घनी छांव के समान है, उनके रहते दुख, ताप, पीड़ा और काली छाया के अंगारे तक भी आपको छू नहीं सकते। देवतीर्थो से पवित्र हृदय वाले पिता अपना जीवन लगाकर अपनी संतति के उद्धार के लिए प्राणपण से लगे रहते हैं।
- जब पिता रहते हैं, तो पल-पल; क्षण-क्षण ईश्वरीय सत्ता का ज्ञान ही नहीं कराते, बल्कि जीवन का कतरा-कतरा देव सत्ता से अधिशासित होने का बोध कराकर, हर उपलब्धि का श्रेय नीली छतरी वाले को देते नहीं अघाते और परोक्षत अपनों के कल्याण के लिए चिंतातुर रहते हैं। यदि उनके प्रति पवित्रता और आस्था का भाव है, तो कभी भी और कहीं भी संकट, दुख व अवसाद के क्षणों में वैसे ही अंगुली थामे रहते हैं-जैसे अबोध बचपन में। ईश्वर में प्रबल आस्था पिता के लिए ऊर्जा का कारण बनती है जिससे प्रेरित होकर वह प्रभुसत्ता का प्रसाद जब-तब अपनों को देने के लिए उतावले रहते हैं। पिता प्रेम, श्रद्धा और आस्था के सिवाय अपनों से कुछ भी नहीं चाहते। बदले में उन्हें वह देना चाहते हैं, जो कभी भी न समाप्त होने वाला हो।
- पिता अपनों की रक्षा और कल्याण के लिए हर क्षण; हर पल; हर देश और दिशा में तत्पर रहते हैं। दुख और संकट के क्षणों में पिता के प्रति भावपूर्ण एक आह्वान और पुकार उन्हें अपनी ओर बरबस ऐसे खींच लाती है- जैसे दुख-दारुण में फंसे भक्त की रक्षा के लिए सब कुछ छोड़कर भगवान दौड़े चले आते हैं। पिता इस भौतिक रुग्ण जीवन की रामबाण औषधि ही नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतरों की इस देहयात्र की नाव को पार लगाने वाले चमत्कारी खेवनहार भी हैं। ऐसे जीवंत देवतुल्य पितृसत्ता को नमन, जो न होने पर होने से भी अधिक अक्षर-ब्रह्म और अस्तित्व का आभास कराते हैं-हर पल।
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