Thursday, May 26, 2016

छोटी सी बात रिश्ते को खूबसूरत बना सकती है

  • छोटी सी बात रिश्ते को खूबसूरत बना सकती है. कभी जरा सी मुस्कुराहट और दूसरे का हृदय तुम्हारे लिये खुल जाता है, और तुम्हारी आंखों में कभी जरा सी कड़वाहट, और दूसरा तुम्हारे लिये बंद हो जाता है.
और इसके विपरीत भी है। जो व्यक्ति दूसरों के साथ संबंधित नहीं हो सकता, वह स्वयं से संबंधित होने में भी कठिनाई अनुभव करेगा, क्योंकि संबंधित होने की कला एक ही है. तुम चाहे दूसरों से संबंधित होओ, या स्वयं से संबंधित होओ, इससे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता-यह एक ही कला है। 
ये दोनों कलाएं साथ-साथ सीखने की जरूरत है, उन्हें अलग नहीं किया जा सकता. लोगों के साथ होओ, लेकिन बेहोश में नहीं, बल्कि होशपूर्ण. लोगों से संबंधित होओ, जैसे कि तुम गीत गा रहे हो, जैसे कि तुम बांसुरी बजा रहे हो.हर व्यक्ति को ऐसा होना चाहिये जैसे वाद्ययंत्र। सम्मान करो, प्रेम करो, पूजा करो-क्योंकि हर व्यक्ति परमात्मा का छिपा रूप है. 
इसलिए हमेशा ध्यान रखो. बहुत सजग होओ. ध्यान रखो कि कि तुम क्या कह रहे हो, ध्यान रखो कि तुम क्या कर रहे हो. छोटी सी बात रिश्ते को खत्म कर सकती है, और छोटी सी बात रिश्ते हो खूबसूरत बना सकती है. यह बहुत नाजुक घटना है। दूसरो के साथ रिश्ता आईना होना चाहिये। 
देखो कि तुम क्या कर रहे हो, कैसे तुम इसे कर रहे हो, और क्या हो रहा है। देखो कि दूसरो को क्या हो रहा है कैसे तुम उनके लिये नर्क पैदा कर रहे हो? तो अलग हो जाओ. अपना ढंग बदलो. अपने आसपास जीवन को सुंदर बनाओ. सभी को महसूस होने दो कि तुम्हारे साथ होना एक उपहार है, सिर्फ तुम्हारे साथ होने से से कुछ प्रवाहित होने लगता है, कुछ फूल खिलने लगते है. यह सब महसूस होने दो लोगों को. और, जब अेकेले हो तो पूरी तरह मौन बैठो, संपूर्ण मौन में, और स्वयं को देखो. अपनी श्वास को देखो, अपने को पूर्णता में देखो बिना किसी दखल के बस देखना। यह बहुत होश जगाता है. तुम भीतर प्रकाश से भरते जाते हो. यह ध्यान की कला है। 
दोनों याद रखों, ऐसा कि जैसा पक्षी के दो पंख होते है, वैसे ही प्रेम और ध्यान को अपने ही पंख हो जाने दो. दोनों के बीच के लयबद्धता पैदा करो ताकि वे किसी भी तरह से एक दूसरे के साथ द्वद में न रहे बल्कि एक-दूसरे को पोषित करे, एक-दूसरे को आहार दे, एक-दूसरे की मदद करें. 

Wednesday, May 25, 2016

जीवन मूल्य भी देते है पिता

  • पिता जीवन ही नहीं देते, जीवन मूल्य भी देते हैं। इस दुर्लभ संसार में लाने वाले पिता देवताओं, ऋषियों और देवतीर्र्थो से भी अधिक पूजनीय और वंदनीय हैं। आज जो भी वैभव, यश, मान और प्रतिष्ठ आपके पास है, उसमें पूज्य पिता की साधना, यश, तप और शुभकामनाओं की ही खुशबू यत्र-तत्र-सर्वत्र समाई है। उन्होंने तिल-तिल जलकर अपना सारा जीवन व शक्ति आपके व्यक्तित्व के निर्माण में लगा दिया। 

  • पिता का साया बरगद की घनी छांव के समान है, उनके रहते दुख, ताप, पीड़ा और काली छाया के अंगारे तक भी आपको छू नहीं सकते। देवतीर्थो से पवित्र हृदय वाले पिता अपना जीवन लगाकर अपनी संतति के उद्धार के लिए प्राणपण से लगे रहते हैं।
  • जब पिता रहते हैं, तो पल-पल; क्षण-क्षण ईश्वरीय सत्ता का ज्ञान ही नहीं कराते, बल्कि जीवन का कतरा-कतरा देव सत्ता से अधिशासित होने का बोध कराकर, हर उपलब्धि का श्रेय नीली छतरी वाले को देते नहीं अघाते और परोक्षत अपनों के कल्याण के लिए चिंतातुर रहते हैं। यदि उनके प्रति पवित्रता और आस्था का भाव है, तो कभी भी और कहीं भी संकट, दुख व अवसाद के क्षणों में वैसे ही अंगुली थामे रहते हैं-जैसे अबोध बचपन में। ईश्वर में प्रबल आस्था पिता के लिए ऊर्जा का कारण बनती है जिससे प्रेरित होकर वह प्रभुसत्ता का प्रसाद जब-तब अपनों को देने के लिए उतावले रहते हैं। पिता प्रेम, श्रद्धा और आस्था के सिवाय अपनों से कुछ भी नहीं चाहते। बदले में उन्हें वह देना चाहते हैं, जो कभी भी न समाप्त होने वाला हो।
  • पिता अपनों की रक्षा और कल्याण के लिए हर क्षण; हर पल; हर देश और दिशा में तत्पर रहते हैं। दुख और संकट के क्षणों में पिता के प्रति भावपूर्ण एक आह्वान और पुकार उन्हें अपनी ओर बरबस ऐसे खींच लाती है- जैसे दुख-दारुण में फंसे भक्त की रक्षा के लिए सब कुछ छोड़कर भगवान दौड़े चले आते हैं। पिता इस भौतिक रुग्ण जीवन की रामबाण औषधि ही नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतरों की इस देहयात्र की नाव को पार लगाने वाले चमत्कारी खेवनहार भी हैं। ऐसे जीवंत देवतुल्य पितृसत्ता को नमन, जो न होने पर होने से भी अधिक अक्षर-ब्रह्म और अस्तित्व का आभास कराते हैं-हर पल।

Tuesday, May 24, 2016

Accha व्यवहार


  • अच्छे व्यवहार का रहस्य

हम साधारण मनुष्य अक्सर किसी से नाराज हो जाते हैं या किसी को भला-बुरा कह देते हैं, पर संतो का स्वाभाव इसके विपरीत हमेशा सौम्य व् मधुर बना रहता है। संत तुकाराम का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही था, वे न कभी किसी पर क्रोध करते और न किसी को भला-बुरा कहते। आइये इस कहानी के माध्यम से जानते हैं कि आखिर संत तुकाराम के इस अच्छे व्यवहार का रहस्य क्या था।

  • अच्छे व्यवहार का रहस्य 

एक बार की बात है संत तुकाराम अपने आश्रम में बैठे हुए थे। तभी उनका एक शिष्य, जो स्वाभाव से थोड़ा क्रोधी था उनके समक्ष आया और बोला, गुरूजी, आप कैसे अपना व्यवहार इतना मधुर बनाये रहते हैं, ना आप किसी पे क्रोध करते हैं और ना ही किसी को कुछ भला-बुरा कहते हैं?
कृपया अपने इस अच्छे व्यवहार का रहस्य बताइए।
संत बोले, मुझे अपने रहस्य के बारे में तो नहीं पता, पर मैं तुम्हारा रहस्य जानता हूँ !
मेरा रहस्य! वह क्या है गुरु जी?, शिष्य ने आश्चर्य से पूछा।
तुम अगले एक हफ्ते में मरने वाले हो!, संत तुकाराम दुखी होते हुए बोले।
कोई और कहता तो शिष्य ये बात मजाक में टाल सकता था, पर स्वयं संत तुकाराम के मुख से निकली बात को कोई कैसे काट सकता था?
शिष्य उदास हो गया और गुरु का आशीर्वाद ले वहां से चला गया।
उस समय से शिष्य का स्वाभाव बिलकुल बदल सा गया। वह हर किसी से प्रेम से मिलता और कभी किसी पे क्रोध न करता, अपना ज्यादातर समय ध्यान और पूजा में लगाता। वह उनके पास भी जाता जिससे उसने कभी गलत व्यवहार किया हो और उनसे माफी मांगता।
देखते-देखते संत की भविष्यवाणी को एक हफ्ते पूरे होने को आये। शिष्य ने सोचा चलो एक आखिरी बार गुरु के दर्शन कर आशीर्वाद ले लेते हैं।
वह उनके समक्ष पहुंचा और बोला,  गुरु जी, मेरा समय पूरा होने वाला है, कृपया मुझे आशीर्वाद दीजिये!
मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है पुत्र। अच्छा, ये बताओ कि पिछले सात दिन कैसे बीते? क्या तुम पहले की तरह ही लोगों से नाराज हुए, उन्हें अपशब्द कहे?, संत तुकाराम ने प्रश्न किया।
नहीं-नहीं, बिलकुल नहीं। मेरे पास जीने के लिए सिर्फ सात दिन थे, मैं इसे बेकार की बातों में कैसे गँवा सकता था? मैं तो सबसे प्रेम से मिला, और जिन लोगों का कभी दिल दुखाया था उनसे क्षमा भी मांगी, शिष्य तत्परता से बोला।
संत तुकाराम मुस्कुराए और बोले, बस यही तो मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है। मैं जानता हूँ कि मैं कभी भी मर सकता हूँ, इसलिए मैं हर किसी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करता हूँ, और यही मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है।
 शिष्य समझ गया कि संत तुकाराम ने उसे जीवन का यह पाठ पढ़ाने के लिए ही मृत्यु का भय दिखाया था, उसने मन ही मन इस पाठ को याद रखने का प्रण किया और गुरु के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ गया।

Monday, May 23, 2016

कड़ी मेहनत करो


  • जब जीवन से रूबरू होते हैं हमें स्वस्थ और खुश कौन रखता हैं यदि आप अभी निवेश कर रहे हैं आपके सुनहरे कल के लिए तो आप अपनी शक्ति और समय कहाँ लगायेंगे? SCIENTIST Ne लखपतियों का एक सर्वे किया गया उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य क्या थे, उनमे से 80% ने कहा था कि जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य था अमीर बनाना अन्य 50% जो उसी युवा वयस्कों में से थे दूसरा बड़ा जीवन का लक्ष्य था नाम कमाना, प्रसिद्धि पाना.
  • कड़ी मेहनत करो, अधिक से अधिक प्राप्त करो हमें यह बताया गया कि यही वे चीजें जिनके पीछे हमें लगना हैं इससे ही हमें अच्छा जीवन मिलेगा . पूरे जीवन की तस्वीरें, जो रास्ते लोगो ने चुने और उन रास्तों पर उन्हें क्या मिला, वे तस्वीरें मिल पाना लगभग असम्भव हैं मानवीय जीवन के बारे में हम जानना चाहते हैं हम लोगो से उनके भूतकाल की यादों को पूछकर जानते हैं और जैसा कि हम जानते हैं यादे तो यादे हैं हमारे जीवन में जो होता हैं, उसका अधिकांश भाग हम भूल जाते हैं, और कभी-कभी हमारी याददाश्त सीधे-सीधे रचनात्मक होती.

लक्ष्य प्राप्ति


  • लक्ष्य प्राप्ति की प्रक्रिया को इलास्टिक यानि लोचदार बनायें. यात्रा के आरंभ में तो लक्ष्य बदल सकते हैं मध्य में नहीं तो अनापेक्षित स्थितियों में अपने व्यवहार में लोच बनायें. तभी पीटर और हेनरी ने देखा कि एक शार्क मछली मुह खोले उनके तरफ आ रही है. हेनरी नाव से कूद गया और पास से जा रहे जहाज पर चढ़ गाँव वापस आ गया. पीटर हिम्मत नहीं हारा और शार्क के मुंह में पतवार घुसा दिया जिससे शार्क भाग गयी.

सकारात्मकता का अमृत

  • आप अपने आप को देखें कि आप किस सोच के धनी है। कहीं आपके भीतर नकारात्मक सोच तो नहीं पल रही है। नकारात्मकता हमारे जीवन का जहर और सकारात्मकता हमारे जीवन का अमृत है। अगर आप किसी फैक्ट्री के मालिक हैं या किसी दुकान के मालिक हैं, किसी संस्था के अध्यक्ष हैं, किसी समाज का संचालन कर रहे हैं, घर और परिवार के मुखिया हैं तो आपके सही संचालन की पहली अनिवार्यता है कि आपकी सोच सकारात्मक हो, विधायक हो। अगर आपकी सोच सकारातमक है तो आप सही नजरिये से निर्णय करेंगे। सास और बहू घर में दो महिलाएं हैं और तो और अगर किसी आश्रम में भी दो लोग हैं।अगर ये वहां परस्पर दिन भर नकारात्मक रवैया अपना रहे है तो मान लीजिए ये दोनों दिन भर अशांत हैं, और अगर दोनों सकारात्मक रवैया लेकर चल रहे हैं तो दोनों ही शांत है।

खुशहाल जीवन जीने के आसान तरीके


सफलता और ख़ुशी  जीवन के दो पूरक है और इन दोनों में से कोई एक न रहे तो दूसरे मिलना मुस्किल है.  जीवन में अलग अलग परीस्थिया  होती पर हमें तालमेल बैठाए रखना  पड़ता है. 

खुश रहे

हम सब चाहते है की हम अपनी जिंदगी में एवरेस्ट जैसी उचाई को छुए, खुशियो को जीवन भर के जिए और दुनिया में सितारा बनकर उभरे पर यह   में आगे बढ़ने का कोई बड़ा सम्बल और प्रेरणा मिले..